दिल्ली में मिली लड़की की चूत गांड की चुदाई- 1

सेक्सी लड़की की चूत चुदाई कहानी में पढ़ें कि मैं कोचिंग के लिए दिल्ली आया तो मेरी दोस्ती एक लड़की से हुई. हम एक साथ पढ़ाई करने लगे. बात आगे कैसे बढ़ी?

फ्रेंड्स, यहां पर ये मेरी पहली सच्ची Xxx कहानी है. मेरा नाम जयंत है और ये एक सेक्सी लड़की की चूत चुदाई कहानी है.

मेरी उम्र अभी 26 साल की है. ये 2 साल पहले उस वक्त की घटना है, जब मैं पढ़ाई करने दिल्ली में नया नया आया था. मुझे एसएससी की तैयारी करना थी.

मैं दिल्ली के मुखर्जी नगर में एक रूम किराए पर लेकर रहने लगा था और मेरी पढ़ाई अच्छे से होने लगी थी.

अब चूंकि मैं नया नया दिल्ली गया था तो वहां का माहौल देख कर दिल खुश हो गया था.
छोटे शहर में रहने के कारण मैं अपने जीवन में बहुत कुछ पहली बार देख रहा था.

मैं एक दिन स्टेशनरी की दुकान पर गया. मुझे एक किताब लेनी थी.
उसी समय उस दुकान पर एक सेक्सी सी लड़की भी आई, उसे भी कोई किताब लेनी थी.

मैंने उसे देखा तो देखता ही रह गया. ऐसा लगा मानो भगवान ने उसे फ़ुर्सत में बनाया हो.

उसकी गांड बहुत बड़ी थी. उसके मटकते चूतड़ों को देख कर मेरा मन हुआ कि लंड फंसा कर उसी में समा जाऊं.

वो हद से ज्यादा सेक्सी थी. मगर ऐसे थोड़ी ही होता है कि चूत देखी और चढ़ जाऊं.
मैंने खुद को कंट्रोल किया और उसे देखने लगा.

वो अपनी किताब लेने में व्यस्त हो गई थी.

उसी समय मेरे एक दोस्त का कॉल आया.
मेरे दोस्त को भी कुछ किताबें लेनी थीं और वो मुझसे पूछ रहा था कि कौन से राइटर की लूं.
मैं उसे फोन पर टिप्स देने लगा.

हमारी बातें उस लड़की ने भी सुन लीं.
फिर जब मैंने फोन रखा तो वो खुद मेरे पास आई और बोली- यार, किताब लेने में आप मेरी भी हेल्प कर दो.
उसके इस सवाल से मुझे अन्दर से बहुत खुशी हुई.

मैंने उसकी हेल्प की, उसे बताया कि कौन से लेखक की किताब लेना चाहिए.

कुछ देर बाद हम दोनों दुकान से बाहर निकल आए.
हमारा परिचय हुआ.

उसने अपना नाम फ़ारिज़ा बताया.
वो इंदौर से थी और वो भी रेलवे की तैयारी करने दिल्ली आई थी.
बातों बातों में उसने मुझे अपने घर वालों के बारे में बताया.

उसके बाद मैं उसे मेट्रो तक ड्रॉप करने गया क्योंकि वो दिल्ली के दूसरे इलाके में रहती थी और वो मुखर्जी नगर में कोचिंग के लिए आती थी.

इसी बीच में मैंने उसका नंबर भी मांग लिया.
उसने भी खुशी खुशी मुझे अपना फोन नंबर दे दिया.

घर पहुंच कर सबसे पहले मैंने उसे व्हाट्सैप पर मैसेज किया.

उसने उसी समय बात करना शुरू कर दी.

मैं- हाय फ़ारिज़ा, मैं जयन्त.
फ़ारिज़ा- हाय जयंत, आज किताब की सलाह देने के लिए थैंक्स. तुमसे मिल कर काफ़ी अच्छा लगा यार!

मैं- हां मुझे भी अच्छा लगा, तुम घर पहुंच गई?
फ़ारिज़ा- हां पहुंच गई. अब रेस्ट करने जा रही हूँ. तुम उधर ही रहते हो न!

मैं- हां मैं मुखर्जी नगर में ही उसी दुकान के पास रहता हूँ.
‘हां मैंने देखा है … मेरी कोचिंग क्लास भी वहीं चलती है.’

मैंने- कौन सी कोचिंग में जाती हो?
उसने कोचिंग का नाम बताया.

मैंने कहा- हां वो जगह मेरे कमरे के पास ही है.
वो बोली- ओके मैं कल मिलती हूँ.

मैं- ओके बाइ फ़ारिज़ा.
फ़ारिज़ा- बाय.

अगले दिन मेरी दिन की शुरुआत उसके गुड मॉर्निंग के मैसेज से हुई.
इसी तरह से हम दोनों अगले 5 दिन बात करते रहे.

शनिवार को उसने मुझसे कहा- यार, मेरे कुछ डाउट्स हैं, तो क्या मैं पढ़ाई करने तुम्हारे रूम पर आ जाऊं?
ये सुनकर मैंने बोला- हां आ जाओ.

मैं बहुत खुश हुआ और मैंने सोचा कि लौंडिया खुद रूम पर आने को मचल रही है.
इसका मतलब वो खुद भी मुझसे चुदना चाहती है. आज साली की चुदाई करके रहूँगा.

वो शाम को सात बजे मेरे रूम में आ गई और हम दोनों ने पढ़ाई शुरू कर दी.
हमने दस बजे रात तक पढ़ाई की.

मेरे मन में तो उसकी चुदाई की चुल्ल थी पर डर भी लग रहा था कि साली कहीं कुछ बवाल ना कर दे.

फिर रात 10 बजे हम दोनों ने डिनर किया और बेड पर लेट गए.

ये वो पल आ गया था, जब माहौल बनने लगा था.
हम दोनों पर्सनल बात करने लगे.

उसी समय मैंने उसका हाथ पकड़ लिया.
उसने भी मना नहीं किया.

धीरे धीरे हम दोनों करीब आ गए और मैंने उसे उसके होंठों पर किस किया.

पहले तो उसने मुझे धक्का देकर दूर कर दिया पर मैंने उसके दोनों हाथ पकड़ लिए और कुछ जबरन किस किया.

उसका मन भी था. कुछ पल बाद वो मेरा साथ देने लगी.

किस करते वक़्त मैंने अपने हाथों का जादू उसके चूचों पर दिखाना शुरू कर दिया.
मैं उसके टॉप के ऊपर से ही उसके बूब्स दबाने लगा.

वो हल्के हल्के से आवाज़ निकालने लगी.
इधर मेरा लंड भी खड़ा हो गया था और पैंट के अन्दर इतना कड़क हो गया कि दर्द कर रहा था.
उसे भी आज़ादी चाहिए थी पर मैं कोई जल्दबाज़ी नहीं करना चाहता था.

फिर पता नहीं अचानक से उसे क्या हुआ, उसने मुझे दूर कर दिया.

वो बोली- ये सब ग़लत है. मत करो.
मैंने बोला- अब तो वापस नहीं आ सकते हैं, हम दोनों इतनी आगे पहुंच गए हैं.

उसने गुस्से में मना किया, जिसे देख कर मैं भी डर गया.
वो बोली- ये सब ग़लत हो रहा है.

मैंने भी मौके की नज़ाकत को समझते हुए उससे कुछ नहीं कहा.

फिर मैंने बोला- मेरा लंड बहुत दर्द दे रहा, खड़ा हो गया. इसका क्या करूं. ऐसे में तो मुझे नींद ही नहीं आएगी. ये तो केएलपीडी हो गई है.
उसने हंस कर कहा- बाथरूम में जाकर मुठ मार लो.

मुझे गुस्सा आ गया.
मैंने कहा- जब तुम सामने हो तो मैं मुठ क्यों मारूं? तुम अपने हाथों से ही शांत कर दो न इसे!

इतना बोल कर मैंने अपना पैंट नीचे कर दिया. मेरा लंड पहले से तो खड़ा ही था.
जब उसने मेरे लंड को देखा तो वो शर्मा गई और उसने अपनी आंखें बंद कर लीं.

मैंने कहा- छूकर तो देखो फ़ारिज़ा … तुम्हें अच्छा लगेगा.

ये कह कर मैंने उसका हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया, पर उसने एक झटके से हटा लिया.

फिर मैंने उससे पूछा- इतना क्यों शर्मा रही हो? पॉर्न नहीं देखती क्या!
उसने कहा- पॉर्न तो देखती हूँ, पर रियल में किसी का लंड पहली बार देख रही हूँ, इसलिए जरा अजीब सा लग रहा है.

मैंने बोला- पॉर्न में जैसे लंड हिलाते हैं, वैसे कर दो और इसे मुँह में लेकर प्यार कर दो.
उसने लंड मुँह में लेने से मना कर दिया.

मैंने बोला- ठीक है, हाथ से हिला कर ही पानी निकाल दो.
मेरे बहुत बोलने के बाद उसने लंड हिलाना चालू कर दिया.

यकीन मानो दोस्तो, लड़की के हाथ में जादू होता है. उसके छूते ही लंड पहले से ज्यादा तन गया और मुझे काफ़ी मज़ा आने लगा.

कुछ मिनट बाद मेरा पानी निकलने वाला था.

मैंने फ़ारिज़ा से बोला- मेरा आने वाला है. उसने और तेज़ी से लंड हिलाना शुरू कर दिया.
मैं ‘ऑश … अहह …’ करते हुए अकड़ गया और मेरे लंड से पानी निकल गया.

मेरे लंड की पिचकारी बहुत दूर तक जाकर गिरी.

वो लंड छोड़ने लगी तो मैंने उसके हाथ पर हाथ रख दिया और कहा- जब तक मैं मना ना करूं, तब तक हिलाती रहो.

जब मेरे लंड से आखिरी बूंद निकल गई और लंड बेजान हो गया.
तब मैंने उससे कहा- अब बस करो.

उसके बाद उसने एक कपड़ा लेकर लंड को साफ़ किया.
वो बोली- अब सो जाओ. तुम्हारी बदमाशी बहुत हुई.
मैं हैरान था कि इतना कुछ होने के बाद भी उसे चुदवाने का मन क्यों नहीं हुआ?

खैर मुझे क्या … मैं तो शांत हो चुका था इसलिए सो गया.

अगले दिन सुबह सुबह करीब 5 बजे मुझे कुछ अजीब सी फीलिंग हुई.
मैंने नींद से जागते हुए आंख को खोला, तो देखा कि फ़ारिज़ा मेरा लंड चूसने में लगी हुई है.

वो इतनी बेदर्दी से लंड चूस रही थी मानो उसे खा जाना चाहती हो.
जंगली बिल्ली की तरह लंड को चूहा समझ कर चूस रही थी.

मैंने उसे देखा और उसके सर पर हाथ फेरने लगा.
उसने मेरी तरफ वासना से देखा.

मैंने पूछा- क्या हो गया मेरे बाबू को?
उसने कहा- यार, अब मुझसे नहीं रहा जाता.
मैं हंस दिया.

उसने मुझे धक्का देकर बेड पर लेटा दिया और बहुत ही इत्मीनान से मेरे लंड को खड़ा करने में लग गई.

उसके लंड चूसने का स्टाइल ऐसा था कि आज भी वो सीन याद करता हूँ, तो मुठ मारना पड़ता है.

वो मेरे लंड को पीछे की ओर ले जाती और ऊपर के पिंक भाग को अपनी जीभ से चाटती थी, जिससे मेरे शरीर में मुझे अजीब से झुरझुरी होने लगती थी.

उसने करीब दस मिनट तक लंड को बड़े अच्छे से चूसा. उसके बाद वो मेरे ऊपर बैठ गई और अपना टॉप ऊपर की ओर करके अपने मम्मे दिखाने लगी.

वो बोली- आ जा मेरे लवड़े, मेरे मम्मों का दूध पी ले.
ये कह कर उसने अपने एक चूची को मेरे मुँह में दे दिया.

वो रंडी की भाषा में बोली- चल साले, आज मेरे मम्मों का रस निचोड़ ले.

मुझे और क्या चाहिए था, सुबह सुबह आंख खुले और सामने चूची चूसने को मिल जाए तो फिर क्या कहने.
मैं भी भूखे भिखारी की तरह चूची चूसने लगा और काटने लगा.

एक चूची को मैं चूस रहा था और दूसरे के निपल्स के साथ खेल रहा था. अपने हाथों से उसके निपल्स को दबा रहा था, खींच रहा था.

वो बहुत तेज आवाज़ कर रही थी.
उसके बाद मैंने पहली चूची को छोड़ा और दूसरी पर आ गया.
उसे भी मैंने अच्छे से चूसा.

अब तक शायद वो बहुत ज्यादा गीली हो गई थी.
यहां मेरा लंड भी फटने को हो गया था.

इसलिए उसने अपनी पैंटी खोली और मेरे लंड पर चूत सैट करके बैठ गई.
सेक्स की भाषा में इसे काऊगर्ल पोजीशन बोलते हैं.

आह दोस्तो, एक गीली चूत में खड़े लंड का जाना … वैसी फीलिंग शायद जन्नत में भी ना मिले.
जन्नत की हूरें भी मेरे उस वक्त के सुख की बराबरी नहीं कर सकती थीं.

फिर अचानक घप्प से मेरा पूरा लंड उसकी गीली चूत में समा गया और मैंने अहह करके आवाज़ निकाल दी.

मैं उसे किस करने लगा.
हम दोनों ने इस पोजीशन में सेक्स का मजा लेना शुरू कर दिया. साथ ही मैं उसे किस का रहा था जीभ चूस रहा था जिससे चुदाई का मजा दोगुना आ रहा था.

मैंने उसके निपल्स चूसने शुरू कर दिए और गांड उठा कर नीचे से हल्के हल्के धक्के मारने लगा.

मैं कोई जल्दबाज़ी नहीं करना चाहता था. हल्के हल्के धक्के मारने से उसकी चूत और गीली होने लगी.

उसने मुझसे कहा- अब तेज़ी से धक्के मारो.
मैंने 5 मिनट तक तेज़ी से मारे.

फिर मैं थक गया तो उसने लौड़े पर कूदना शुरू कर दिया.
उसके कूदने से चुदाई की लयताल मस्त मिल रही थी.
फट फट की बहुत आवाजें आ रही थीं.

करीब दस मिनट तक उसने मेरे खड़े लंड की सवारी की और लंड को अच्छे से भोगा.
फिर मैं उसके ऊपर आ गया और वो नीचे आ गई.

मैंने उसे धकापेल चोदना जारी रखा.
उसने भी नीचे से अपनी गांड उठा कर धक्के मारने शुरू कर दिए.

अब शायद किसी भी पल हम दोनों का रस निकलने वाला था, मैंने फ़ारिज़ा से कहा- बेबी, शायद अब मैं झड़ जाऊंगा.
वो बोली- अन्दर ही गिरा दो प्लीज़!

ये सुनकर मैंने तेज़ी से 10-12 धक्के मारे और ज़ोर से चिल्लाते हुए झड़ना शुरू कर दिया.

इसी के साथ उसने मेरी पीठ पर अपने नाखून गड़ा दिए और चिल्लाती हुई झड़ने लगी.
ऐसा लग रहा था कि बॉडी की पूरी एनर्जी नीचे के रास्ते से निकल रही है.
करीब एक मिनट बाद हम दोनों शांत हो गए.

दोस्तो, आपको सेक्सी लड़की की चूत चुदाई कहानी में मजा आ रहा होगा. सेक्स कहानी के अगले भाग में मैं फ़ारिज़ा की गांड की चुदाई की कहानी को लिखूंगा.
आप सब मुझे मेल करें.
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सेक्सी लड़की की चूत चुदाई कहानी का अगला भाग:

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