आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को चोदा

गर्म चूत का चूत चुदाई का मजा मुझे मिला जब मैं सर्वे किया करता था और नयी-नयी जगह आना-जाना होता था। एक जगह एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मुझसे चुद गयी.

नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम राज है।
मेरी पिछली कहानी थी: डिलीवरी बॉय से शादी की सालगिरह पर चुदवाया

आज मैं आपको अपने जीवन की एक सेक्स घटना बताने जा रहा हूं।
यह बात काफी पुरानी है।

उस वक्त मैं सर्वे के लिए काम किया करता था। हमें सर्वे के लिए हर रोज नयी जगह जाना होता था।
इस क्षेत्र में घूमना तो बहुत पड़ता है लेकिन मजा भी उतना ही आता है।

ऐसे ही एक बार हम मध्य प्रदेश के भिंड जिले में सर्वे के लिए गए हुए थे।
वहां पर हमारी मदद के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी साथ में हो लीं।

एक कार्यकर्ता से मेरी काफी बात हुई और ऐसे ही उससे दोस्ती हो गई।
वो भी 35-36 साल की उम्र की महिला थी।

हम दोनों ने एक दूसरे के नम्बर ले लिए थे। दो दिन में ही उससे चैट पर बातें होने लगीं।
दूसरे दिन हमने रात के 2 बजे तक बात की।

वो एक शादीशुदा औरत थी और उसने अपने आपको बहुत ही सुडौल बनाकर रखा हुआ था।
अगले दिन काम निपटाकर हम आंगनबाड़ी में आ गए।

उसने अपनी सह-कार्यकर्ता को घर भेज दिया।

केंद्र उसके अपने घर में ही खोला गया था।
वो मेरे लिए चाय बनाने चली गई।

जब चाय लेकर आई तो मेरे सामने रखते हुए वो बिल्कुल झुक गई।
उसके ब्लाउज के अंदर मुझे उसकी गोरी और गोल-गोल चूचियां लटकती हुई दिख गईं।
उसने नीचे ब्रा भी नहीं पहनी थी।

उसकी चूचियां देखकर मेरा तो लंड एकमद से तनाव में आने लगा।

जब उसने देखा कि मैं उसकी चूचियों की घाटी में देख रहा हूं तो वो मुस्करा दी और बोली- गर्म है काफी … ध्यान से मुंह लगाना!
मैंने उसकी ओर हैरानी से देखा तो बोली- चाय का कप बहुत गर्म है, ध्यान से मुंह लगाना।

ये कहकर वो हंसने लगी और सामने बैठकर चाय पीने लगी।
उसने अभी भी पल्लू ऊपर नहीं किया था।
उसके मंगलसूत्र के पीछे उसकी गोरी चूचियों की क्लीवेज से मेरा ध्यान हट ही नहीं रहा था।

मेरा लंड पैंट में एक तरफ तनकर अलग से दिखने लगा था।
मैं उसको अपने हाथ से छुपाने की कोशिश तो कर रहा था लेकिन हाथ लगते ही कमबख्त और ज्यादा फड़फड़ाने लगता था।

वो भी बार बार मेरे लंड की ओर ही देख रही थी।

फिर उसने उठकर गेट बंद कर लिया।
मैंने कहा- आंगनबाड़ी का टाइम खत्म हो गया क्या?
वो बोली- हां, बस आधे घंटे और खुली रहेगी लेकिन अब बंद ही समझो।

कहते हुए वो मेरे बगल में आकर बैठ गई और उसने मेरे तने हुए लौड़े पर हाथ रख दिया।
मेरे बदन में 1100 वोल्ट का करंट दौड़ गया।
उसका मुलायम हाथ मेरे तपते लंड पर सहला रहा था।

हम दोनों की नजरें मिलीं और मैंने कप को टेबल पर रखकर उसके हाथ को लंड पर और जोर से दबा दिया।
इतने में ही दोनों के होंठ भी मिल गए और मैं वहीं सोफे पर उसको लेकर लेट गया।
वो मेरे ऊपर थी और मैं नीचे।

मैं साड़ी के ऊपर से उसकी गांड को दबाने लगा और वो नीचे हाथ किए हुए मेरे लौड़े को रगड़ रही थी।
हम दोनों एक दूसरे के मुंह में जीभ देकर लार चूस रहे थे।
वो भी काफी प्यासी लग रही थी।

उससे मेरी शर्ट खुलने तक इंतजार न हुआ और जल्दी से मेरी शर्ट के बटन खोलकर मेरी गर्दन और छाती को बेतहाशा चूमने लगी।
मैं उसके चूतड़ों को जोर जोर से भींचने लगा।
वो मेरी छाती को चूमते हुए नीचे पैंट तक पहुंच गई।

अब उसने मेरी पैंट की बेल्ट को खोल लिया और पैंट का हुक खोलने लगी।

हुक खोलकर उसने अंडरवियर के ऊपर से मेरे तने हुए लौड़े पर हाथ फिराया और मेरी तरफ देखकर कातिलाना स्माइल देने लगी, बोली- मस्त सामान है आपका!
मैं बोला- अब मेरा कहां रहा … तुम्हारा है ये … जैसे मर्जी इस्तेमाल करो।

इतना सुनते ही उसने मेरी पैंट को खींचकर नीचे कर दिया और लंड की शेप को अंडरवियर के ऊपर से ही चाटने लगी।
उसने चाट चाटकर मेरे अंडरवियर को लंड के ऊपर से बिल्कुल गीला कर दिया।
मेरा लौड़ा फटने को हो गया था।

अब मुझसे भी रुका न गया और मैंने उसको नीचे फर्श पर बच्चों के लिए बिछी दरी पर उसको गिरा लिया।
मैं उसकी ब्लाउज की क्लीवेज में मुंह देकर चाटने लगा।
उसकी चूचियां ब्लाउज में ऐसे भिंची थीं कि उछलकर बाहर निकलने को हो रही थीं।

मैंने साड़ी को हटाया और उसे ब्लाउज निकालने के लिए कहा।
उसने नीचे से ब्रा नहीं पहनी थी तो ब्लाउज के निकलते ही चूचियां एकदम से बाहर निकल कर उछल गईं।

नंगी चूची देखते ही मैं उन पर टूट पड़ा और उनको जोर जोर से दोनों हाथों का इस्तेमाल करते हुए भींचने लगा।

वो बोली- ज्यादा टाइम नहीं है, जल्दी कर लो। सरकारी मामला है, कोई आ गया तो मुसीबत हो जाएगी।
मैं साड़ी निकालने लगा तो बोली- नंगी नहीं हो सकती।
तो मैं समझ गया कि वो चुदने की जल्दी में है।

मैंने उसकी साड़ी को उठा दिया और जल्दी से पैंटी को नीचे कर दिया।
उसकी चूत पूरी गीली हुई पड़ी थी।

चूत पर काफी सारे बाल थे। एकदम घने काले बाल थे जिनके बीच में सांवली सी चूत के अंदर गुलाबी सी चमड़़ी की झलक मिल रही थी।
चूत के रस में उसकी झांटें भी भीग गई थीं और चमक रही थीं।
ऐसी रसीली चूत देखकर भला मैं चाटे बिना कैसे रह सकता था।

मैंने उसकी जांघों को चौड़ी किया तो चूत के मोटे मोटे होंठ भी खुल गए।
उन काले घने बालों के बीच में लौड़ा लेने के इंतजार में फूल चुके चूत के होंठों पर मैंने जीभ से चाटना शुरू कर दिया।

उसके मुंह से एकदम सिसकारियां निकलने लगीं- आह्ह … स्स्स … हय … उफ्फ … ओह्ह … अंदर तक डालो जीभ।

उसके कहने पर मैं उसकी चूत में जीभ की नोक से अंदर तक चाटने लगा।
अब उसको और ज्यादा मजा आने लगा।

मैंने पूरी जीभ घुसा दी और उसने मेरे सिर को जोर से पकड़ कर अपनी चूत की ओर दबा दिया।

मेरी नाक उसके झांटों में जाकर दब गई और जीभ चूत में पूरी अंदर तक चली गई।
मुझे मजा भी आ रहा था और सांस भी घुट रही थी।
फिर भी मैं उसकी चूत को खाने में लगा रहा।

जीभ अंदर घुसेड़ते हुए उसकी चूत के होंठों को बीच-बीच में काटता रहा।
वो पागल सी होने लगी और उसने उठते हुए मुझे नीचे पटका और मेरी पैंट को अंडरवियर समेत घुटनों तक नीचे कर दिया।
उसने लौड़े को मुंह में भरा और तेजी से चूसने लगी।

उसकी चुसाई देख मैं तो पागल सा होने लगा।
वो बहुत अच्छे से चूस रही थी। लंड को जैसे चूत का ही मजा मिल रहा था।

मेरे लंड पर मुंह मारते हुए उसे कुछ ही सेकंड बीते थे कि मैं सातवें आसमान में उड़ने लगा।

लौड़ा चुसवाने में बहुत दिनों के बाद इतना आनंद मिल रहा था।
मन तो कर रहा था कि चुसवाते हुए ही इसके मुंह में वीर्य निकाल दूं।
लेकिन वक्त की कमी थी और दोबारा चुदाई करने का चांस शायद फिर न मिलता।

उसको मैंने नीचे लिटाया और उसकी चूत पर लंड के सुपारे को रगड़ने लगा।
मैंने झटका लगाया और मेरा आधा लंड उसकी चूत में उतर गया।

फिर मैंने दूसरा धक्का दिया और एक आह्ह … के साथ उसने चूत में पूरे लंड को जगह दे दी।

लौड़ा पूरा घुसते ही उसने मुझे अपने ऊपर खींच लिया और मेरे होंठों को चूसते हुए चोदने का इशारा देने लगी।
मैंने कमर को हिलाते हुए उसकी चूत को ठोकना शुरू कर दिया।
आह्ह … इतना मजा आ रहा था कि क्या बताऊं!

बड़ी रसीली चूत थी उसकी … एकदम से गर्म और काफी टाइट भी।
शायद उसका पति उसको कम ही चोदता होगा, वर्ना इस उम्र में ऐसी टाइट चूत का चूत बहुत कम मिलती है।

दो मिनट बाद उसको पूरा मजा मिलने लगा और उसने मेरे नंगे चूतड़ों पर अपनी टांगें लपेट लीं जिससे लंड चूत की जड़ तक उतरने लगा।
अब मैंने झटके और गहरे कर दिए।

हर झटके के साथ उसकी आह्ह … आई … आह्ह … करके आवाजें निकलने लगीं।

उसके चेहरे पर हर धक्के के साथ दर्द और आनंद के भाव मैं देख रहा था। उसके हाथ मेरी कमर को प्यार से सहला रहे थे, मानो वो स्वर्ग की सैर कर रही हो।

फिर मैंने चूत से लंड को निकाल दिया और उसे कुतिया वाली पोजीशन में आने को कहा।
वो सोफे के पास जाकर झुक गई।

मैंने पीछे खड़ा होकर उसकी चूत में लंड को उतार दिया और कुत्ते की तरह उसको चोदने लगा।
वो भी अपनी गांड की चक्की चलाते हुए मेरे लंड को जैसे पीसने लगी।

चुदाई के बड़े पैंतरे आते थे उसे, मैं देखकर हैरान था।
कुछ देर घोड़ी पोजीशन में चुदने के बाद वो बोली- नीचे लेट जाओ।

मैं नीचे लेटा तो वो ऊपर आकर मेरे लंड पर बैठ गई और आगे पीछे होते हुए चुदने लगी।

अब मैं स्वर्ग की सैर कर रहा था।
इतनी मस्त तरीके से वो गांड चला रही थी कि लौड़ा भाव विभोर हो रहा था।
लेकिन इतने मजे में ज्यादा देर टिकने वाला नहीं था ये।

मैंने उसको रुकने के लिए कहा।
वो समझ गई कि मेरा छूट सकता है।

फिर वो नीचे झुक कर मेरे होंठों को चूसने लगी।
हम दोनों की जीभ एक दूसरे के मुंह में जाकर लार का आदान-प्रदान करने लगीं।

दो मिनट रुकने के बाद उसने फिर से आगे पीछे होना शुरू किया।
जब वो थक गई तो मैंने उसको सोफे पर टांग रखने के लिए कहा।

उसने टांग रखी तो उसकी चूत फैलकर मेरे सामने आ गई।

मैंने नीचे से लौड़ा उसकी फूली हुई चूत में चढ़ा दिया और तेजी से चोदने लगा।
अब मैंने उसकी चूचियों को भींचना भी शुरू कर दिया।
उसको डबल मजा मिलने लगा और एकदम से उसकी चूत ने बड़ा सारा पानी मेरे लंड पर छोड़ दिया।

लंड पच-पच करते हुए अंदर बाहर होने लगा।
मैं भी पूरी स्पीड में लगा हुआ था क्योंकि मैं स्खलन को दो बार तो रोक चुका था लेकिन अब रोकने का मन नहीं कर रहा था।
मैं स्खलन के परम आनंद को अब पाना चाहता था।

मैं तेजी से उसकी चूत में धक्के लगाता रहा और 2 मिनट के बाद मैंने कसकर उसकी चूचियों को भींचा और उसकी कमर पर झुक गया।
कुत्ते की तरह चूत में लंड फंसाए हुए मेरे बदन में झटके लगने लगे।

हर झटके के साथ वीर्य की पिचकारी उसकी चूत में अंदर भर रही थी।
मैंने 6-7 झटकों में सारा माल उसकी चूत में खाली कर दिया।
ऐसा लगा जैसे आंधी आकर चली गई हो।

हम दोनों पूरी तरह से संतुष्ट हो चुके थे।
इसके बाद भी वो मेरे लौड़े को चूत में लिए हुए कुछ देर सोफे पर मुझे अपनी बांहों में लिए पड़ी रही।
मैं भी उसकी गोद में जैसे सो जाना चाहता था और नींद पूरी करना चाहता था।

लेकिन हमारे पास इतना समय नहीं था।
हम दोनों उठे और कपड़े ठीक कर लिए।

उसके बाद हम बैठकर बातें करने लगे और थोड़ी देर बाद मैं वहां से निकल आया।

उसके बाद भी मैं कई दिनों तक वहां रुका।
इस दौरान मैंने उसे रोज रूम पर बुलाया लेकिन वो दो बार ही आ सकी।
दो बार हम दोनों ने खूब गहरी चुदाई की।

वो मेरी चुदाई से काफी खुश हो गई थी।
मुझे भी उसकी चूत मारने में ऐसा मजा मिला जो इससे पहले नहीं मिला था।
उसकी चुदाई की तकनीक का मैं कायल हो गया था।

फिर मुझे वहां से आना पड़ा।

हमारी उसके बाद कई बार फोन पर भी बात हुई।
वो भी दोबारा मिलना चाहती थी और मैं भी फिर से उसकी चूत की गर्मी का स्वाद लेना चाहता था।
लेकिन ऐसा मौका नहीं सध पाया कि हम फिर से तृप्ति का अनुभव ले सकें।

कुछ महीने के बाद उसको कॉल लगना बंद हो गया।
मैंने इंटरनेट पर भी उसको बहुत ढूंढा लेकिन वो नहीं मिली।

उस आंगनबाड़ी वाली औरत की चुदाई मुझे आज भी रोमांचित कर देती है।
मैं सोचता हूं कि फिर से कोई वैसी ही गर्म औरत मिल जाए जो काम का पूरा सुख दे सके।

उसके बाद भी मैंने कई भाभियों और आंटियों को चोदा लेकिन वैसा मजा नहीं मिला है।
मैं उम्मीद कर रहा हूं कि कोई तो होगी जो उसकी तरह अपनी गर्म चूत का चूत चुदाई का मजा लेती होगी।

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