घरेलू काम वालियों की चुदाई-5

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माया को एक चुदाई का मजा आ चुका था। वो बाथरूम से चूत को साफ़ करके और मूत कर तो आ गयी थी मगर अभी भी नंगी ही थी। मैं तो नंगा ही लेटा हुआ था।

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माया कुछ पल ऐसे ही खड़ी रही – कुछ सोच रही थी। फिर बोली, “बाबू जी सुमन को चोदोगे “?

मैं हैरान हो गया। मुझे तो अपने कानों पर विश्वास ही नहीं हुआ की माया सुमन की चुदाई की बात कर रही थी। मगर माया के यह कहने से ये साफ़ हो गया कि कुसुम ने माया से सुमन की बात की थी।

माया खुद मुझे सुमन को चोदने की बात कह रही थी जिसको चोदने के ख्याल हमेशा मेरे दिमाग में घूमते रहते थे।

मैंने बनावटी हैरानी से पूछा, “माया, ये क्या कह रही हो ? सुमन तुम्हारी ….. ”

माया ने बीच में ही टोक कर कहा, “वो सब छोड़ो बाबू जी। ये बताओ चोदोगे ?

मैं क्या जवाब देता ?

माया ही बोली, “बाबू जी सुमन नई नई जवानी में आयी है। आपने तो देखा ही है उसकी जवानी – फटने को है। कालोनी के आवारा लड़के उसके पीछे पड़े हैं। लड़कों के गंदे गंदे इशारों से सुमन भी चुदाई चाहने लगी है”।

” मैंने खुद कई बार उसे चूत में उंगली करके पानी छुड़ाते देखा है। अगर कहीं एक भी आवारा लड़के के हत्थे चढ़ गयी तो पूरा लड़कों का ग्रुप चोदेगा उसे। अब हम जैसे लोग इन गुंडे आवारा लोगों का सामना नहीं कर सकते। ऊपर से मेरा शराबी खसम – उसका बस चले तो इसको धंधे पर बिठा दे”।

“बाबू जी कालोनी की जवान लड़कियों को शहरी बिगड़ैल लड़के ढेर सारे पैसे खर्च करके भी चोदना चाहते हैं I मेहनत करने के कारण कालोनी की लड़कियों जिस्म कड़क हो जाता है”।

फिर माया मेरी तरफ देख कर मुस्कुरा कर बोली, “आपको तो ये सब पता ही है”।

मैंने सोचा ………..और चूत पानी भी तो नहीं छोड़ती – रगड़ कर लंड अंदर जाता है।

माया बोली, “आप एक बार चोद लोगे तो सुमन की चुदाई की हवस ठंडी हो जाएगी, और फिर बीबी जी तो पांच छह महीनों के लिए गयी हैं। बीच बीच में मैं या कुसुम ले आया करेंगी सुमन को यहां आपके पास “।

बिलकुल यही बातें मुझे कुसुम ने भी बताई थी। मैं कुछ सोचने लगा – मैं बोलता भी तो क्या बोलता।

माया बोली, “क्या सोच रहे हो बाबू जी। वैसे आप भी तो चोदना चाहते हो सुमन को और सुमन भी तो आपकी तरफ बड़ी हसरत से देखती है”।

सोचना मैंने क्या था। कुसुम की बातें सुन सुन कर पहले से सुमन की चुदाई का भूत मेरे सर पर चढ़ा बैठा था। माया ने तो अब सुमन की चूत ही प्लेट में सजा कर मेरे सामने रख दी थी। सुमन की चूत और उसके तने हुए मम्मों का ध्यान आते ही मेरे लंड में फिर हरकत होने लगी। लंड फिर से खड़ा होने लगा।

मेरे लंड पर नजर पड़ते ही माया बोली, “ये क्या बाबू जी ? आपका तो फिर खड़ा हो रहा है ? एक बार और चोदना है क्या “?

नंगी तो माया थी ही। ये कह कर माया बेड के सहारे उल्टी खड़ी हो गयी और चूतड़ पीछे कर लिए। मेरे “हां चोदनी है” बोलने का इंतज़ार भी नहीं किया।

माया के चूतड़ देख मेरा फिर पूरा खड़ा हो गया – खूंटे की तरह।। मैं माया के पीछे गया और उसके चूतड़ों पर अपना लंड फेरने लगा।

माया के चूतड़ों पर भी काटे जाने के निशान थे। मैंने माया की चूतड़ों पर हल्का हल्का काटा। माया की सिसकारी निकली “आआह बाबू जी”।

मैंने माया के चूतड़ थोड़ा ऊपर उठाये कि चूत थोड़ी ऊपर हो जाए और मैं चूत में लंड डाल सकूं।

कद की छोटी होने के कारण माया की चूत का छेद नीचे था। चूतड़ ऊपर उठाने के बावजूद भी लंड अंदर डालने में मुझे मुश्किल पेश आ रही थी।

मैंने फिर माया के चूतड़ थोड़े ऊपर उठाए और अपने घुटनों को थोड़ा मोड़ कर लंड चूत के छेद के सामने लाने की कोशिश की, मगर बात बनी नहीं।

मैं सोच ही रहा था कि माया को बोलूं कि या तो बेड के किनारे पर लेट जाए या घुटनो और कुहनियों के बल किनारे पर उकडू हो कर उलटा लेट जाए।

तभी माया बोल पडी ,”क्या हुआ बाबू जी चूत ज़्यादा नीचे है क्या”?

मैंने कहा “हां माया किसी और तरीके से करें”?

माया बोल पडी, “छोड़ो बाबू जी चूत को। जो छेद सामने है, उसी में लंड डाल दो और कर दो चुदाई “।

माया के कहने का मतलब था “गांड ही चोद दो”।

क्रीम तो जब से कुसुम की गांड चोदी थी वहीं पडी थी। मैंने क्रीम माया की गांड के छेद पर लगाई और उंगली से गांड के अंदर भी लगा दी।

जैसे ही उंगली पूरी डाली माया ने सिसकारी ली , “आह बाबू जी”।

गांड के अंदर बाहर अच्छी तरह क्रीम लगा कर मैंने लंड माया की गांड के छेद पर रक्खा और लंड अंदर धकेला। लंड रगड़ कर अंदर पूरा बैठ गया। कुसुम की तरह ही माया की गांड चुदी हुई थी, मगर कुसुम की गांड से ज्यादा टाइट थी।

मैंने माया के चूतड़ पकडे और चुदाई चालू कर दी।

जल्दी ही माया ने अपनी उंगली से अपनी चूत रगड़नी शुरू कर दी – जैसे कुसुम ने की थी। लग ही रहा था कि कालोनी की औरतें गांड भी चुदवाती रहती हैं।

दस मिनट के धुआंधार धक्कों के के बाद मेरा लेसदार पानी माया की गांड में निकल गया। माया तो अपनी चूत रगड़ रगड़ कर अपना पानी छुड़ा ही चुकी थी।

कुछ देर मैं ऐसे ही खड़ा रहा। जब लंड ढीला हो गया तो मैंने लंड माया की चूत से निकाला और सीधा बाथरूम में चला गया मैं मूत कर लंड धो ही रहा था कि माया भी आ गयी और नीचे बैठ कर सररररररर की आवाज से मूतने लगी।

फिर पानी से चूत और गांड की धुलाई की और बोली, “बाबू जी बड़ा ही मस्त चोदते हो आप। चूत चुदवाने का मजा तो आया ही था गांड चुदवाने का भी मजा आ गया”।

हम दोनों बाहर आ गए। माया को आये एक घंटा हो गया था। जल्दी जल्दी माया ने कपड़े पहने और निकल गयी।

माया ने एक बार ही सुमन की बात की थी, उसके बाद सुमन की कोइ बात नहीं हुई।

अगले दो दिन भी माया के साथ ऐसे ही चुदाई होती रही।

अब तो कुसुम भी मथुरा वृन्दावन से वापस आने वाली थी। चौथे दिन कुसुम भी आ गयी। धोने के लिए कपड़े ज्यादा थे नहीं । एक दिन बीच में माया ने धो दिए थे।

कुसुम कपड़े धो कर बोली, “साहब चाय बनाऊं”?

कुसुम ने चुदाई के लिए नहीं बोला – मैंने भी कहा “बना लो”।

फिर मैंने ऐसे ही बोल दिया, “लगता है आज माया लेट हो गयी है”।

कुसुम बोली “हां साहब, आने वाली ही होगी”। फिर कुछ पल चुप रहने के बाद बोली, “साहब, माया सुमन को ले कर आएगी”।

मेरा माथा ठनका। “सुमन को ? और ये बात कुसुम बता रही है” ? मैं सोच रहा था ये चक्कर क्या है ?

कुसुम चाय बना ही रही थी कि माया आ गयी – सुमन साथ ही थी।

सजी संवरी, साफ़ सुथरे कपड़े पहने। बड़ी मस्त लग रही थी। सुमन ने मुझे नमस्ते की और एक तरफ खड़ी हो गयी। कुसुम ने सभी के लिए चाय बना ली। धोने के लिए बर्तन तो ज्यादा थे नहीं। चार चाय वाले कप थे और थोड़े से बर्तन और थे।

चाय पी कर कुसुम माया से बोली, “माया बर्तन मैं धो दूंगी”। मतलब कुसुम माया को जाने का इशारा कर रही थी।

माया मुझसे बोली, “बाबू जी मैं चलती हूं। घंटे भर बाद आऊंगी I सुमन यहीं है – कुसुम भी यहीं है”। सोच सोच कर ही मेरा लंड खड़ा होने लगा कि आज सुमन चुदेगी ? कुंवारी – ताजी ताजी जवान चूत ? विश्वास नहीं हो रहा था।

मगर माया खुद क्यों नहीं रुकी, कुसुम को बीच में क्यों लाई ? खैर …..मैंने सोचा मिल जाएंगे जवाब।

माया जा चुकी थी। कुसुम सुमन को बोली, “चल आजा सुमन”। और कुसुम सुमन को अंदर कमरे में ले गयी।

पांच सात मिनट बाद आ कर मुझ से बोली, “जाओ साहब आज मजे लो जवान चूत के। फिर हंस कर बोली, “आपने भी बड़े सपने लिए है इसको चोदने के। पता नहीं अब तक ये सुमन चुदी भी है या नहीं, या आप ही उसकी चूत का मुहूर्त करोगे”।

फिर कुसुम बड़े ही समझाने वाले अंदाज में बोली, “एक बात और बोलूं साहब, लिहाज मत करना चुदाई में – रगड़ कर चोदना जैसे मुझे और माया को चोदते हो। ये मत सोचना अब तक चुदी नहीं है इस लिए धीरे धीरे चुदाई करूं। सुमन की चूत गरम हुई पडी है। रगड़ कर चोदोगे तभी उसकी चूत की आग ठंडी होगी और आपको भी पूरा मजा आएगा”।

“कोइ परेशानी होगी तो में यहीं हूं, मैं संभाल लूंगी”।

कुसुम और माया की चुदाई से ये तो मैं जान ही चुका था की कैसी धुआंधार चुदाई की शौक़ीन होती हैं ये कालोनी वालियां।

मेरा लंड पायजामे में से बाहर आने के लिए बेचैन हो रहा था। मेरा मन तो का रहा था के एक चुदाई तो कुसुम की ही कर दूं। मगर सुमन की प्यासी चूत की कहानियां सुन सुन कर मैं सुमन की चूत भरना चाहता था।

मैंने कुसुम से पूछा, “कुसुम माया सुमन को छोड़ कर क्यों चली गयी और तुम …….” मैंने बात बीच में ही छोड़ दी।

कुसुम बोली “साहब माया की आप से दो दिन पहले बात हुई होगी। माया को लग रहा था आप कुछ हिचकिचा से रहे थे क्योंकि सुमन कुंवारी है”।

कुसुम फिर वही बात बोली “साहब सुमन कालोनी की लड़की है, ज्यादा दिन कुंवारी नहीं रहने वाली। कालोनी के बहुत लड़के इसके पीछे हैं – और फिर माया का घर वाला वो तो सुमन की चूत की बोली लगाने को तैयार है”।

मैंने फिर पूछा, ” कुसुम तुम और माया आपस में सारी बातें एक दूसरी से सांझा करती हो”?

कुसुम बोली, ”साहब अब आप से मैं क्या छुपाऊं, माया का शराबी खसम नामर्द है – ढंग से चुदाई नहीं कर पाता। माया मेरे पति मुरारी से चुदवाती है मेरे सामने। सुमन भी ये जानती है। कालोनियों में ऐसे ही चलता है। अब जाइये आप अंदर I सुमन सपने देख रही होगी चुदाई के। दर्शन करवाईये उसे अपने मोटे लंड के और तोड़िये उसकी चूत की सील। “।

जैसे ही मैं जाने के लिए उठा, मैंने देखा मेरा खड़ा लंड पायजामे में अच्छा खासा उभार पैदा कर रहा था।

कुसुम ने मेरे लंड का उभर देखा और पाजामे के ऊपर से ही मेरा लंड पकड़ कर बोली, “साहब मेरा तो अपना मन करने लगा है अभी कि अभी आपसे चुदाई करवाने का “।

मैंने कहा “तो कुसुम तुम भी आ जाओ”।

कुसुम बोली “नहीं साहब सुमन के सामने नहीं। आज आप सुमन के साथ मजे लो I मैं तो आती ही रहूंगी। मुझे तो जब मन करे चोद लेना। आज सुमन की चूत रगड़ कर चोदो “।

अंदर चला गया। सुमन नंगी ही बेड के एक तरफ खड़ी थी। सुमन ने अपने हाथों से अपनी चूत ढंकी हुई थी।

कुसुम ने बेड पर एक चद्दर बिछा दी थी दुहरी करके। शायद इस लिए की कहीं सुमन की चूत में से सील फटने से खून रिसे तो बेड के गद्दे में न जाये।

मैं सुमन के पास गया और आरती की तनी हुई चूचियां धीरे धीरे मसलने लगा। सुमन की चूचियों के निप्पल अभी छोटे छोटे हल्के गुलाबी रंगत के थे।

मैंने चूचियों के निप्पल चूसने शुरू किये। सुमन को उतने में ही मजा आने लगा। सुमन ने अपनी चूत से हाथ हटा कर मेरा सर चूचियों पर दबा दिया, और धीमी आवाजमें “आह आह” करने लगी।

मैंने एक हाथ सुमन की चूत पर फिराया। चूत पर नरम नरम बाल थे।

मैंने चूत की फांकें चौड़ी करने की कोशिश की मगर खड़ी सुमन की चूत नहीं खुली।

मैंने सुमन को बेड के किनारे पर बिठा दिया और अपने कपड़े भी उतार दिए।

मेरा मोटा लम्बा खड़ा लंड सुमन की आंखो के सामने था। सुमन की नजर लंड से हट ही नहीं रही थी। शायद पहली बार किसी मर्द का खड़ा लंड देख रही थी।

मैंने सुमन को कहा ” सुमन पकड़ो इसको। सुमन ने लंड से बिना नजर हटाए लंड पकड़ लिया। सुमन लंड को हल्का हल्का दबाने लगी।

मैंने सुमन के हाथ के ऊपर हाथ रखा और लंड को सुमन के होठों पर छुआ दिया। सुमन ने नजर उठा कर देखा जैसे पूछ रही हो, “अब”?

मैंने कहा “सुमन चूसो इसे। सुमन ने लंड मुंह में ले लिया और बड़े हल्के हल्के चूसने लगी। जल्दी ही सुमन को लंड चुसाई अच्छी लगने लगी”।

सुमन ने मेरा लंड जोर जोर से चूसने लगी। साथ ही अपने हाथ लंड पर घुमा रही थी – लंड मुंह में अंदर बाहर कर रही थी। लंड चूसते चूसते सुमन के मुंह से पुच्च पुच्च हम्म हम्म्म हम्म की आवाजें निकल रहीं थीं।

मैं हैरान रह गया। इतना पागलपन ? मैं हाथों से सुमन की तनी हुई चूचियों के निप्पल मसल रहा था। मेरा लंड फनफना रहा था।

कुंवारी सुमन की चुसाई ने लंड कड़क कर दिया था।

मुझे लगा अब चुदाई करनी चाहिए कही सुमन के मुंह में ही ना छूट जाये। मैंने सुमन के मुंह से लंड निकला और उसे को बेड के किनारे पर ही लिटा दिया।

सुमन ने खुद ही टांगें उठा कर चौड़ी कर दी। मैंने चूत की फांकें खोली और सुमन की चूत का दाना चूसने लगा।

सुमन की झांटों में से भी मस्त सेक्सी तीखी खुशबू आ रही थी। सुमन की चूत गीली थी – कुसुम और माया के चूतों की तरह सूखी नहीं थी।

शायद चूत का पानी झांटों में ज्यादा लगता था – मूत तो झांटों में लगता ही होगा।। मैं सुमन की चूत के दाने पर जुबान फेरने लगा। सुमन की सिसकारियां निकल रही थीं आह आह आअह। सुमन की सिसकारियों की आवाज़ जरूर कुसुम को भी सुनाई दे रही होगी।

एकदम मुझे लगा सुमन की चूत ने बहुत ज्यादा पानी छोड़ा है। मेरा पूरा मुंह गीला हो गया।

सुमन के चूतड़ भी हिलने लगे।

क्या लंड मांग रही थी? मांग ही रही होगी।

जैसे सुमन ने जोर जोर लंड चूसा था और लेटते ही टांगें चौड़ी कर दी थी, सुमन सच ही लंड की प्यासी लग रही थी।

मैंने सुमन को उठाया और बेड के ऊपर चद्दर पर लिटा दिया। सुमन के चूतड़ों के नीचे तकिया रख कर चूतड़ उठाये टांगे चौड़ी कर दी और चूत की फांकें खोल कर चूत में लंड ऊपर नीचे किया।

एक जगह लंड के सुपाड़े पर कुछ अलग सा महसूस हुआ। ये चूत का छेद था। बड़ा ही छोटा सा छेद।

मैंने लंड इस जगह के ऊपर रखा और सुमन को पीछे से जकड लिया।

मेरा सारा वजन मेरी कुहनियों और घुटनों पर था।

मैंने हल्का सा धक्का लगाया और थोड़ा सा लंड छेद में डाल दिया । सुमन के मुंह से चीख निकली आह …… और उसने मुझे रोकने की कोशिश। मैं समझ गया कुंवारी चूत है। सील फटेगी।

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