डॉक्टरनी और नर्स की चूत चुदाई का मजा- 1

डॉक्टर सेक्स कहानी में पढ़ें कि एक एम्बुलेंस डाइवर ने गाँव की डॉक्टरनी को कैसे चोदा. वो दोनों अस्पताल के क्वाटरों में ही रहते थे.

हाय दोस्तो, मैं आप सबका असलम. नमस्ते आदाब!
मेरी पिछली कहानी थी: गुजराती भाभी और उनकी ननद की चुदाई

आज मैं फिर से एक नयी Xxx कहानी लेकर हाजिर हूँ.
मुझे उम्मीद है कि आप सब इस डॉक्टर सेक्स कहानी को पसंद करेंगे.

दोस्तो, लॉकडाउन में बहुत लोगों की नौकरी चली गई थी, बहुत सी फैक्ट्री और कंपनियां बंद हो गयी थीं.

मेरे साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ.
मैं जिस फैक्ट्री में काम करता था, वो लॉकडाउन के चलते बंद करनी पड़ी. इस वजह से मुझे भी फैक्ट्री से निकलना पड़ा.

अब मेरे पास जॉब नहीं था.

मैंने सोचा कि अब कोई ऐसा काम मिले, जिससे जितना भी लॉकडाउन क्यों ना हो, पर मेरा काम चलता रहे.
यही सब सोचते हुए मैं अखबार में नौकरी के एड देख रहा था.
मेरी नजर एक एड पर गयी, वो एक ड्राईवर की जॉब देने वाली एक एजेंसी की एड थी.

चूंकि मुझे ड्राइविंग अच्छे से आती थी तो मैंने तुरंत उस एड पर, जो सम्पर्क करने वाला फोन नम्बर लिखा था, उस पर कॉल किया.
वहां से मुझे पता दिया गया और बोला गया कि कल इस पते पर आकर बात करो.

फिर मैं दूसरे दिन उस पते पर चला गया.

मैं जिस पते पर गया था, वो उसी एजेंसी का ऑफिस था.
वहां सुनील नाम के एक सर थे.
मैंने काम के बारे में बातचीत की.

सुनील- असलम तुम इससे पहले क्या करते थे?
मैं- जी, मैं फैक्ट्री में काम करता था.

सुनील- ओके, काम क्यों छोड़ दिया?
मैं- सर वो काम मैंने नहीं छोड़ा है. वो फैक्ट्री लॉकडाउन के चलते बंद हो गयी है.

सुनील- ठीक है … ठीक है … यह ड्राइवर की जॉब है, यह तो तुम जानते ही होगे असलम.
मैं उनकी बात काटते हुए बोला- जी जानता हूँ सर.

सुनील जी बोले- तुम्हें एम्बुलेंस की ड्राइविंग करनी होगी. आजकल जो माहौल है, तो हमारी एजेंसी के पास प्राइवेट और कुछ सरकारी हास्पिटल में एम्बुलेंस ड्राइवर की डिमांड आई है. अभी कोरोना की वजह से जल्दी ड्राइवर मिलते नहीं हैं, तो क्या तुम ये जॉब कर लोगे?
मैं- जी, मुझे ड्राइविंग करना आता है और मैं कर लूंगा. वैसे भी अभी मेरे पास कोई काम नहीं है.

उस तरह से मैंने उस जॉब के लिए हां कर दी और पूछ लिया कि सैलरी कितनी मिलेगी?
तब सुनील जी बोले- महीने के 28,000 मिलेंगे और बीमा भी मिलेगा. लेकिन जॉब में समय फ़िक्स नहीं होगा, कभी नाइट शिफ्ट भी हो सकती है, कभी 12 घंटे या 24 घंटे भी शिफ्ट रह सकती है. अभी जिस तरह के हालात हैं, तो ऐसा ही चलेगा. फिर जब सब ठीक हो जाएगा तब 7 घंटे की ड्यूटी रहेगी.

मैंने सारी शर्तें मान कर हां कर दिया.
उन्होंने भी मेरे सारे कागजात चैक किए कि मेरा आधार कार्ड कहां का है और बाकी मेरी ड्राइविंग आदि के बारे में सब कुछ जाना.

फिर उन्होंने संतुष्ट होकर मुझे एक कागज देते हुए कहा- ठीक है कल से ड्यूटी शुरू कर दो. ये नजदीक के गांव का सरकारी अस्पताल है, वहां पर चले जाना. उधर 345 नंबर की एम्बुलेंस रहेगी, वो अब तुम चलाओगे.

ये कह कर मुझे सुनील जी ने एम्बुलेंस की चाबी दे दी जो उनके ऑफिस में ही थी.

अब मैं अगले दिन हॉस्पिटल गया और ड्यूटी शुरू कर दी.

ये हॉस्पिटल गांव का था इसलिए इतना बड़ा नहीं था.

मैं वहां एक नर्स से मिला. उसका नाम सुरभि था.
वो लगभग 26 साल की होगी, एकदम धांसू माल लग रही थी. उसका फिगर यही कोई 32-30-34 का रहा होगा.

मैं अभी सुरभि को अपनी आंखों से चोद ही रहा था कि इतने में अन्दर के केबिन से आवाज आयी- सुरभि, नया एम्बुलेंस ड्राईवर आया है या नहीं … वरना सुनील जी की एजेंसी में फोन करो.

इतने में मैंने सुरभि से कहा- जी मैं असलम, मैं ही एम्बुलेंस का ड्राईवर हूँ.
सुरभि मेरी तरफ देख कर हम्म बोली और अन्दर केबिन में चली गयी.

वो दो मिनट बाद बाहर आयी और बोली- असलम अन्दर जाओ.

जैसे ही मैं केबिन में गया, वहां एक और माल था.
वो सफेद कोट पहने हुई थी और बड़ी कड़क माल दिख रही थो.

मेरी नजर उसकी छाती पर गयी तो देखा तो नेम प्लेट पर डॉक्टर स्वाति लिखा था.
मुझे अब पता चला कि यह डॉक्टरनी है.

डॉक्टर स्वाति की उम्र 38 से 40 की होगी और जिस्म 36-32-38 का था.

डॉक्टरनी साहिबा, नर्स सुरभि से भी हॉट दिख रही थीं. मेरा मन तो हुआ कि अभी टूट पड़ूँ.
मुझे देखकर डॉक्टर स्वाति कुछ मादक अंदाज में बोली- ह्ह्म्म … तुम हो नए ड्राइवर!

मैं- जी.
मेम धीमे से बुदबुदाई कि बड़े हैंडसम हो.
मैंने कहा- जी कुछ कहा आपने?

मेम- ठीक है, तुम एम्बुलेंस रेडी करो, मैं सुरभि से बोल कर सामान रखवाती हूँ. हमें गांव की एक बस्ती में चैकअप के लिए चलना है.
मैं हां में मुंडी हिलाई और बाहर आ गया.

मैंने एम्बुलेंस स्टार्ट की और उसे हर तरह से चैक करके जाने को रेडी हो गया.

सुरभि ने सामान रखा और हम तीनों निकल गए.

डॉक्टर स्वाति आगे बैठी थी. उसने अपना पल्लू सरका दिया था जिससे मुझे उसके मम्मे दिखने लगे थे.
एक दो बार उसने तिरछी नजर से मुझे उसके आम देखते हुए पकड़ भी लिया मगर कुछ कहा नहीं और पल्लू भी ठीक नहीं किया.
मैं समझ गया कि स्वाति की चूत बड़े आराम से मिल जाएगी.

शाम को हम सभी वापस हॉस्पिटल पहुंचे और गाड़ी लगा दी.
इस हॉस्पिटल मेरा घर जरा दूर था, इसलिए मैंने सुनील जी से बोल कर हॉस्पिटल के स्टाफ क्वार्टर में एक कमरा ले लिया था.

उधर स्टाफ क्वार्टर्स में नर्स सुरभि और डाक्टर स्वाति भी रहती थीं, क्योंकि उन दोनों का घर भी अस्पताल से दूर शहर में था.
उस वक्त के दौर में कभी भी इमरजेंसी होती थी, इसलिए उन्हें हॉस्पिटल क्वार्टर में ही रुकना पड़ता था.

जब मुझे यह पता चला तो मैं खुश हो गया कि असलम तेरा काम हो गया.
मेरा जॉब सही से चलने लगा था और स्वाति मेम भी मुझसे खुलने लगी थीं. उनको शायद मैं भा गया था. वो शक्ल से पक्की चुदक्कड़ लगती थी.

एक दिन शाम को वो अपने क्वार्टर से बाहर निकली और मुझसे बोली- असलम, जरा सिगरेट ले आओ मेरी सिगरेट खत्म हो गई.
एक महिला जब किसी मर्द से सिगरेट मंगाए तो बात समझ आती है कि वो कुछ गर्म है.
मैंने कहा- ठीक है लाता हूँ.

मैं सिगरेट लेकर आया और मैं एकदम से उसके रूम में चला गया.
डॉक्टर स्वाति कपड़े चेंज कर रही थी.

वो स्वाति मुझे देख कर अपने बदन को ढकने लगी और बोली- नोक करके नहीं आ सकते थे!
मैंने आप से तुम पर आते हुए कहा- तुमने ऐसे कैसे दरवाजे बंद किये थे, जो जरा से में खुल गया.

मैंने देखा था तब स्वाति सिर्फ पैंटी पहनी हुई थी और उसके मम्मे साफ़ हिल रहे थे.
उसने झट से एक तौलिया लपेट लिया था.

फिर मैं सिगरेट देकर बाहर चला गया लेकिन मेरे दिमाग से डॉक्टर स्वाति के मम्मे नहीं हट रहे थे.
मैंने स्वाति की नाम की मुठ मारना शुरू कर दी.

ऐसे ही 3 दिन बाद में रूम में कपड़े बदल रहा था और उस वक्त मैं अंडरवियर में था.
उसी समय एकदम से डॉक्टर स्वाति अन्दर आ गयी.

मैं भी उसकी भाषा में ही उससे बोला- नोक करके नहीं आ सकती थी … उस दिन बड़ा बोल रही थीं.
स्वाति मुस्कुरा कर बोली- तुम ठीक से दरवाजा बंद नहीं कर सकते थे?
मैं बोला- मैंने दरवाजे की कुंडी लगाई थी, शायद कुंडी ठीक से बंद नहीं हुई होगी.

मेरा लंड अंडरवियर के अन्दर से पूरा तना दिख रहा था और स्वाति साड़ी में थी.
उसने ब्लैक साड़ी और वो डॉक्टर वाला कोट पहनी हुई थी.

फिर स्वाति आंख दबा कर चली गई.
मैं समझ तो रहा था कि ये चुदने मचल रही है, लेकिन समझ नहीं आ रहा था कि कैसे शुरुआत करूं.

दो दिन बाद स्वाति ने मुझसे अपने केबिन में बुलाया और अपने मम्मे सहलाती हुई वासना भरी बोली- असलम, मैंने जब से तुम्हें अंडरवियर में देखा है, तब से …
मैंने भी अपने लंड को सहलाया और उसकी बात काटते हुए कहा- डॉक्टरनी जी, मैंने तो जब तुम्हें पहली बार केबिन में देखा था, तब से मैं तेरे नाम की मुठ मारता हूँ.

फिर डॉक्टर स्वाति एकदम से रंडी की भाषा में बोली- तो आ जा असलम मेरी जान आज मेरी प्यास बुझा दे.
मैंने कहा- इधर केबिन में ही लेगी या कमरे में लेगी?
वो बोली- नहीं यार, कमरे में चल कर मस्ती से लूंगी.

अब मैं और स्वाति कमरे में आ गए थे.
स्वाति ब्लू कलर की साड़ी में थी और उसके खुले कोट से उसकी नाभि दिख रही थी.

मैं और स्वाति पास आ गए.
मैंने स्वाति को बांहों में ले लिया और उसका डॉक्टरी कोट उतार दिया.
हम दोनों किस करने लगे.

‘उन्म्मा उन्म्मा …’
हम दोनों किस किए जा रहे थे.

उसी दरमियान मैंने स्वाति की साड़ी का पल्लू हटा दिया और उसके ब्लाउज के ऊपर से उसके मस्त संतरों को दबाने लगा.
स्वाति बोली- आंह जोर से असलम आज मुझे खूब चुदना है.

यह सुन कर मैं उसके मम्मे और जोर जोर से दबाने लगा.
साथ में हम दोनों किस भी कर रहे थे.
मैं स्वाति के होंठ काट रहा था.

फिर मैंने स्वाति का हाथ पकड़ा और अपने पैंट में डाल लिया.
स्वाति मेरे अंडरवियर के ऊपर से मेरा लंड हिलाने और मसलने लगी.

स्वाति- असलम आज इस लौड़े से मेरी चूत की आग शांत कर दे. मैं दो महीने से नहीं चुदी हूँ.
मैं भी बोला- हां मेरी स्वाति रानी … आज मैं तुझे पूरा मजा दूंगा.

अब मैंने स्वाति का ब्लाउज पेटीकोट उतार दिया.
स्वाति ने भी मेरे कपड़े उतार दिए.

अब स्वाति ब्रा और पैंटी में थी और मैं अंडरवियर में था.
स्वाति की ब्रा के ऊपर से मैं उसके मम्मों को दबाने लगा और स्वाति मेरे लंड से खेलने लगी थी.

हम दोनों किस भी किए जा रहे थे.
ऐसे ही हमें 15 से 20 मिनट हो गए थे.

अब मेरा लंड खड़ा हो कर तन गया था और स्वाति भी गर्म हो गयी थी.

मैंने स्वाति की ब्रा और पैंटी भी उतार दी और स्वाति ने भी मेरा अंडरवियर उतार दिया.
हम दोनों नंगे थे और जल्दी से 69 में आ गए.

मैं स्वाति की चूत चाटने लगा और स्वाति मेरा लंड चूसने लगी.
हम दोनों 69 की पोजीशन में काफी देर तक एक दूसरे के लंड चूत चूसने का मजा लेते रहे.

कुछ देर बाद स्वाति की चूत झड़ गई और वो निढाल हो गई.
मेरा लंड उसके मुँह में ही था.
उसी समय मैंने भी अपना पानी स्वाति के मुँह में टपका दिया.
स्वाति की चूत का पानी एकदम नमकीन था.

कुछ देर बाद स्वाति नंगी उठकर अल्मारी से दारू की बोतल और सिगरेट उठा लाई.

हम दोनों ने पैग बनाए और दो दो पैग गटक लिए. स्वाति सिगरेट सुलगा कर मस्त होने लगी और मेरे लंड को सहलाने लगी.

दोस्तो, डॉक्टर स्वाति की चूत चुदाई का पूरा मजा मैं इस डॉक्टर सेक्स कहानी के अगले भाग में लिखूँगा.
उसी के साथ नर्स सुरभि भी किस तरह से मेरे लौड़े के नीचे आई उसकी चूत गांड चुदाई की कहानी भी लिखूंगा. आप मुझे मेल करें.
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डॉक्टर सेक्स कहानी का अगला भाग:

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